वोटर आईडी के लिए अब आधार और मोबाइल नंबर अनिवार्य, चुनाव आयोग का बड़ा बदलाव

वोटर आईडी के लिए अब आधार और मोबाइल नंबर अनिवार्य, चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

नई दिल्ली:
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े कामकाज को और पारदर्शी व सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब यदि कोई नागरिक ऑनलाइन वोटर लिस्ट से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल करना चाहता है—जैसे नया नाम जोड़ना, पुराने नाम में सुधार करना या फिर किसी का नाम हटवाना—तो उसे आधार नंबर के साथ लिंक मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा। आयोग का कहना है कि यह बदलाव मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जरूरी है।

क्यों जरूरी किया गया आधार और मोबाइल नंबर?

पिछले कई चुनावों में आयोग के सामने एक बड़ी समस्या सामने आई थी—मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम, मृतकों के नाम बने रहना और काल्पनिक पहचान के जरिए वोट डालने की संभावना। इन खामियों की वजह से चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठते थे। अब आयोग का मानना है कि आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर अनिवार्य करने से OTP आधारित ई-साइन प्रक्रिया लागू होगी और हर आवेदन की असली पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी।

ऑनलाइन आवेदन की नई प्रक्रिया

अब यदि कोई नागरिक ऑनलाइन पोर्टल या ऐप के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना चाहता है, तो उसे अपना आधार नंबर डालना होगा। उसके बाद उसी आधार से जुड़े मोबाइल पर एक ओटीपी (OTP) आएगा। इस ओटीपी को भरने के बाद ही आवेदन आगे बढ़ेगा।

  • नाम जोड़ने (Form 6),

  • नाम हटाने या आपत्ति दर्ज करने (Form 7),

  • विवरण सुधार (Form 8),

इन सभी फॉर्म्स के लिए Aadhaar-linked मोबाइल नंबर जरूरी होगा।

क्या बिना आधार के भी बनेगा वोटर आईडी?

यह सवाल आम लोगों के मन में सबसे ज्यादा उठ रहा है। आयोग का कहना है कि आधार और मोबाइल लिंकिंग से ऑनलाइन प्रक्रिया तो पूरी तरह आसान और सुरक्षित होगी, लेकिन जिन नागरिकों के पास आधार या उससे जुड़ा मोबाइल नंबर नहीं है, वे ऑफलाइन प्रक्रिया से भी आवेदन कर सकते हैं। ऐसे लोगों को वैकल्पिक पहचान प्रमाण पत्र और जरूरी दस्तावेज देने होंगे। यानी आधार देना आसान तरीका है, लेकिन पूरी तरह से अनिवार्य तभी होगा जब आप डिजिटल आवेदन करना चाहते हैं।

पारदर्शिता और सुरक्षा पर असर

इस नए नियम से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कोई भी फर्जी आवेदन आसानी से स्वीकार नहीं किया जा सकेगा।

  • डुप्लीकेट वोटर आईडी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।

  • मृतकों या एक ही नाम से दो-दो वोटर आईडी बने होने की गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।

  • किसी भी बदलाव के लिए जिम्मेदारी तय होगी, क्योंकि ई-साइन केवल उसी व्यक्ति के आधार लिंक मोबाइल से हो सकेगा।

जनता की चिंताएँ

हालांकि, कुछ नागरिक समूहों ने इस फैसले पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि आधार और मोबाइल को अनिवार्य करना गोपनीयता (Privacy) पर असर डाल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के मोबाइल आधार से लिंक नहीं हैं, ऐसे में उन्हें दिक्कत हो सकती है। साथ ही, बुजुर्ग और तकनीक से दूर लोग ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।

आयोग का तर्क

चुनाव आयोग ने इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कहा है कि ऑफलाइन प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। लेकिन डिजिटल युग में पारदर्शिता और गति बढ़ाने के लिए Aadhaar-linked मोबाइल नंबर आवश्यक है। आयोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि आधार डेटा का उपयोग केवल पहचान की पुष्टि के लिए होगा और इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए साझा नहीं किया जाएगा।

आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में ई-गवर्नेंस और डिजिटल चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करेगा। यदि यह व्यवस्था सही ढंग से लागू होती है, तो मतदाता सूची से संबंधित धोखाधड़ी पर काफी हद तक रोक लगेगी। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जरूरी है कि लोगों को इसके बारे में पर्याप्त जानकारी दी जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में आधार-मोबाइल लिंकिंग को आसान बनाया जाए।

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