“जब पहली बार दिल्ली आए थे मोदी: RSS आंदोलन से PMO तक का सफर”

कुछ कम‑प्रसारित बातों में से:

“Modi ने डिवाली में जंगल में पांच दिन बिताए”
 की एक इंटरव्यू‑श्रृंखला (“Humans of Bombay”) में मोदी ने कहा कि हर साल दीवाली के समय वो कुछ दिन जंगल में बिताते थे—बिना रेडियो, टीवी, न्यूज़ के—आत्मचिंतन और अपने अंदर की आवाज़ सुनने के लिए।
ये हिस्सा बहुत कम चर्चा में रहा है, खासकर उन खबरों में जो मोदी के राजनीतिक जन्म‑और‑भगवान वाले मार्केटिंग एंगल पर हैं।

RSS कार्यालय में बर्तन धोने, चाय‑भोजन तैयार करने की कहानिया

उसी “Humans of Bombay” बातचीत में उन्होंने कहा कि RSS के कार्यालय में काम करने का अनुभव हुआ है—किसी‑ने बर्तन धोए, भोजन‑चाय की तैयारी की, सतहें साफ की, आदि। ये बातें कम‑से‑कम मुख्यधारा के राजनीतिक विश्लेषण में कम टॉपिक बनती हैं।

 

Emergency के समय “भेष बदलना”एक रिपोर्ट में है कि आपातकाल (Emergency, 1975‑77) के दौरान मोदी ने दिल्ली के अशोक विहार इलाके में रहे थे और कहते हैं कि उन्होंने खुद को अवसरों पर सिख भेष में भी प्रस्तुत किया था ताकि संभावित गिरफ्तारी या पहचान से बचा जा सके।
हालांकि, इस किस्से की पुष्टि कई स्रोतों में नहीं है और यह थोड़ा विवादित है कि कितना तथ्यात्मक है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *